दुनिया इंसानों से ज्यादा पैसे को अहमियत देती है

कुछ लोगों को गलतफहमी हो जाती है कि दुनिया उनसे चल रही हैI उसे लगने लगता है कि वो नहीं होता तो दुनिया ही नहीं होती जब भी आप ऐसे लोगों को समझाने की कोशिश करो तो उसे लगता है कि इसे मेरी ज़रूरत है I इंसान जिंदगी का एहसान नहीं मानता है लेकिन पैसे का मानता है वो पैसा जिसके होते हुए भी कुछ खुशियां नहीं खरीदी जा सकती और अगर ऐसा होता तो बात ही कुछ और होतीI

खैर, अपनी-अपनी सोच और समझदारी हैI लोग Help को एहसान करना समझते हैं ये दुनिया गोल है कब, कहाँ, और किसकी जरूरत आ जाए लोगों को नहीं समझ आता हैI हमने सोचा ही नहीं कि, भगवान भी टूट जाय तो पत्थर कहलाता है I इसलिये मैं कोशिश करता हूँ कि इंसान रहूँ I इंसान को इज़्ज़त मिल जाए तो पैसे की कीमत नहीं रहती हैI लेकिन पैसा इज़्ज़त से ज्यादा महत्वपूर्ण है यह मुझे नहीं पता था I

इंसान होना सबसे मुश्किल काम है। अहंकार को छोड़कर सही मार्ग का चुनाव करना चाहिए।

मैं तो ये सोच कर हैरान हूँ कि कुछ ऐसे लोग भी मुझे मिले, जिन्हें मैंने इज़्ज़त से स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया, लेकिन जब उनका समय आया तो उसने पैसों से मेरी इज़्ज़त को रौंदने की कोशिश की, अच्छा था कुछ सीखने को मिला मुझे I

वरना उम्र भर ये सीख नहीं पाता, आप बेहतर रहेंगे इसके लिए आवश्यक है कि आप बेहतर सोचें I आपके साथ कई बार ऐसा हुआ होगा कि आपने सोचा होगा कि, शुक्र है मैंने लोगों की बहुत सी बातें नहीं मानी, वर्ना और क्या होता पता नहीं I जिंदगी कभी कभी कुछ अच्छी चीजें इंसान को अनजाने में देती है लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि हम उन्हें कैसे सम्भालते हैं I ज्यादातर मैंने देखा है कि लोगों को अनजाने में या बिना किसी परिश्रम और शर्त के दुनिया की अनमोल वस्तु भी इंसान को मिल जाए तो वह उसकी कदर नहीं करता हैI

शायद मैं बेहतर इंसान नहीं हूँ लेकिन जैसा हूँ बेहतर हूँI और इसके लिए मैं भगवान का धन्यवाद करता हूँI मैं अपने माता पिता का भी धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मुझे अच्छे संस्कार और अच्छी परवरिश दीI मुझे एक इंसान बनाया क्योंकि इंसान बनना सबसे मुश्किल काम हैI जब आप किसी को खुश देखकर खुशी महसूस करें और किसी को दुखी देखकर दुःख महसूस करें तो आप इंसान हैं I

इन सब बातों से कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आएगा,आपकी सोच में, लेकिन अगर ये बातें समझ आ गई तो थोड़ी तकलीफ कम हो जाएगीI और जीवन के सफर में आपको आसानी होगी I जीवन के कई मुश्किल घड़ी में ये आपको मजबूत बनाएगा और आप मुश्किलों में भी मुस्कुराते हुए मुश्किलों का सामना कर पाएंगे I

पैसा होने के बावजूद कोई भी इंसान खुशियां नहीं खरीद सकता, यही इस दुनिया का सच है।

सिर्फ पैसे के लिए कुछ करना हो तो पैसा बहुत मिल जाएगा I इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है I निर्भर करता है कि, आपको उसे प्राप्त करने की लालसा कितनी है और आप किस हद तक उसके लिए प्रयास करते हैंI ये बातें आपको भी पता है और समझ भी आती है लेकिन तकलीफ ये है कि आप सही को सही समझना नहीं चाहते, और गलत को गलत मान कर राजी नहीं हैं I

जिंदगी में पैसे की बहुत अहमियत होती है लेकिन रिश्तों की कीमत उससे कहीं ज्यादा होती है, जो अब नहीं है।

आपने जिंदगी से कई बार पूछा होगा, कितनी बार यही बात की होगी कि, पैसा जीवन में बहुत आवश्यक है I लेकिन फिर भी पैसा आपको हर बार मिलने पर खुशी क्यों नहीं देता I कभी सोचियेगा अगर फ़ुरसत मिले I मैंने कई बार ऐसा सोचा लेकिन मुझे ज्यादा समझ नहीं आया I इसका मुख्य कारण शायद यह भी है कि, मुझे खुद से पैसों के लिए बात करने का समय नहीं मिला I लेकिन ये समझ आ गया कि, पैसे के आगे इंसानियत का कोई मूल्य नहीं होता है I आजकल संसार में पैसा सबसे मूल्यवान वस्तु हैI सबकुछ इससे चलता है, इंसान का मुल्य नहीं रहा, रिश्तों का कोई मुल्य नहीं रहा, सबकुछ बिकाऊ हो गया, सब बिक रहा है I

लेकिन पैसे होने के बावजूद कुछ चीजें नहीं मिल रही हैI
मिट्टी के लटू वाली बचपन की खुशी नहीं मिल रही है I
बचपन में भीगे बदन पर ठंडी हवा से होने वाला सुकून नहीं मिल रहा हैI
बचपन सा हर घड़ी बदलने वाला मन नहीं मिल रहा है I
बचपन के जैसे हर बात पर लड़ने वाले दोस्त नहीं मिल रहे हैंI
बचपन की वो मुहल्ले वाली चाची नहीं मिल रही हैI
मुहल्ले वाली सबकी दादी नहीं मिल रही हैI
दूर कहीं नीचे गिरता नीला आसमान नहीं मिल रहा हैI
बचपन की कोयल की कूक वाली सुबह नहीं मिल रहीI
और तो और बचपन वाली वो रातें भी गुम हो गई हैI
आकाश में चमकने वाला सितारा नहीं मिल रहा हैI
वो प्यारी सी घंटी बजाता सोन पापड़ी वाला नहीं मिल रहाI
गले में सांप लटकाए घूमने वाला सपेरा नहीं मिल रहा हैI
सपेरे की बीन की धुन पर नाचने वाला वो सांप नहीं दिख रहा I
और भी बहुत कुछ नहीं मिल रहा है लेकिन हमारी अदाकारी काबीले तारीफ है I
हम जरा भी ये किसी को महसूस नहीं होने देते हैं I

लोगों को आज भी दूध और शराब में फर्क़ नहीं पता गलती हमारी नहीं, हमारी सोच की है वो रहेगी, क्योंकि हमारे पास किसी को अच्छा समझने के लिए सिर्फ एक वजह ढूढ़ना पड़ता है लेकिन किसी को गलत समझने के लिए काफी वजहें मिल जाती है क्योंकि हमारी नजर और सोच दोनों गलती ढूढ़ने में बचपन से ही एक्सपर्ट हो जाते हैं और जो चीज हम करते आ रहे हैं उसे करने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है I

एक अच्छा इंसान कभी किसी का नुकसान नहीं कर सकता, इसलिए वह दूसरों से बेहतर है

मेरे पास कोई विकल्प या वजह नहीं है कि मैं किसी को अच्छा या बुरा साबित करूँ, लेकिन किसी के लिए समझौता करना भी एक सीमा तक ही उचित है I उसके बाद अगर आप उससे समझौता करते हैं तो आप अपने जीवन के साथ उस का भी जीवन खराब करते हैं क्योंकि वह आपको समझौता करता देख यह गलतफहमी अपने अंदर उत्पन्न कर लेता है कि वह सही कर रहा है और उससे भी ज्यादा इस बात का उसे आत्मविश्वास हो जाता है कि वह जो करेगा सही ही करेगा I उससे गलती होने की सम्भावना ही नहीं है और यह बात उसे तब तक गलती करवाती है जब तक उसका जीवन बर्बाद नहीं हो जाता है I

इसका सबसे प्रमुख कारण है आप के अंदर छुपा हुआ अहंकार जिसका चिकित्सा पद्धति (Scientific) में कोई इलाज अभी तक सम्भव नहीं हुआ है I

संसार की बेशकीमती चीज इंसान को मिल भी जाए तो वह उसकी कदर नहीं करता।

लोग सोचते हैं कि उससे गलती करने की कोई संभावना नहीं है और यही बात उसे तब तक गलती कराती है जब तक कि उसका जीवन बर्बाद न हो जाए।

आखिरी बात, जीवन सबको हर इंसान का शुक्रिया करने का एक बार अवसर देती है हम पर निर्भर करता है कि हम इसे किस तरह इस्तेमाल करते हैं I

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