आपके द्वारा किया गया प्रत्येक निर्णय आपके मूल्यांकन को दर्शाता है कि आप कौन हैं।

जीवन का मूल्यांकन, जब आप किसी इंसान से बेवजह प्यार करते हैं और वही इंसान आपके जीने की वजह बन जाता है। और फिर उसी वजह को आप बेवजह प्यार करते हैं तो आप अनमोल हैं।क्योंकि आप उस मूल्य के परे हैं जिस की वजह से लोग आपका मूल्यांकन करते हैं। जीवन की वास्तविकता बहुत भयावह होती है। हम जिसको जीते हैं उसी को अपनी प्राथमिकता बताने की कोशिश भी करते हैं। यही नहीं जिस को हम खुद से ज्यादा मानने का दावा करते हैं।उसी से अपने लिए दायरे पूछते हैं।

यही जीवन के उन तकलीफों को जन्म देता है जो हमारे लिए बहुत सी कठिनाइयों का जनक है। हम जिसको अपना सबकुछ सौपना चाहते हैं। उसी से जीवन का ज्ञानात्मक और बौधिक सवाल भी करते हैं,जैसे लोग क्या कहेंगे, दुनिया क्या सोचेगी, अपने घरवालों के विश्वास का क्या होगा। पुनः अपने अंदर के डर को जागृत करने के लिए पूरी शक्ति से जुट जाते हैं। और जीवन के किसी और हिस्से में पहुंचकर, जब ऐसा होना दुबारा मुमकिन ना हो। इस बात को याद करते हुए अपने जीवन को मुश्किल बना लेते हैं। मुझे तो ये सबसे ज्यादा मजेदार घटना लगती है।

एक चित्रकार पूर्णता और मूल्यांकन की अवस्थाओं से गुजरता है। यही कला का पूरा रहस्य है।

जीवन का वास्तविक उद्देश्य चाहे जो भी हो। लेकिन ये बातें इंसान को वास्तविक स्थिति से दूर ले जाती है। हम अपनी कल्पना की दुनिया में खो जाते हैं। वो दुनिया काल्पनिक है लेकिन हमें फिर भी अच्छा लगता है। क्योंकि वो दुनिया हमारे हिसाब से बनी होती है।जीवन का सत्य भी कुछ ऐसा ही है।हम उसी तरह की जिंदगी को देखना चाहते हैं जो हमारी इच्छा के अनुरूप बना हुआ हो।यह जरूरी नहीं है कि वह वास्तविक जीवन जैसा दिखे लेकिन जैसा भी दिखे बेहतर दिखे। ये हमारी मन की स्थिति है।

हम अपने मन के ही अनुसार जीवन का चयन करने की इच्छा रखते हैं। शायद ये मुमकिन नहीं है लेकिन ऐसा करने में हमें आनंद का अनुभव होता है।हमारे व्यक्तित्व का स्वामी हमारा मस्तिष्क है। वह अपने हिसाब से आपके साथ व्यवहार करना चाहता है।परन्तु हम उसके विरोध करने की स्थिति में होकर भी उसका विरोध नहीं करते हैं। हमें उसके स्वामी की तरह व्यवहार करना चाहिए।लेकिन ऐसा बहुत ही कम होता है। जीवन का सबसे मुश्किल कार्य यही है।आपकी क्षमता का बोध आपको कभी नहीं होता है। क्योंकि आप उस कल्पना की दुनिया में विचरण करते हैं जो वास्तविक जीवन से काफी अलग है। हमारे विचारों का आदान-प्रदान भी हमारी सोचने की क्षमता पर निर्भर करता है।

यदि आप स्वयं का उच्च मूल्यांकन करते हैं तो नए तथ्यों को पहचानने की आपकी क्षमता कमजोर हो जाती है।

मस्तिष्क को अपने अनुसार चलाना, यह जीवन में एक सबसे मुश्किल कार्य है।जब आप अपने मस्तिष्क का उपयोग एक स्वामी बनकर करने लगते हैं तो आप अक़्सर सफल हो जाते हैं।क्योंकि यह जीवन की ऐसी अवस्था होती है जब आपके हालात, आपके आसपास के लोग कोई भी आपके अनुकूल नहीं होता है। मतलब दुनिया ऐसी लगने लगती है जैसे सब कुछ आपके विरुद्ध हो।और ऐसे हालात में आपको अपने आप पर भरोसा करके कुछ ऐसा करना होता है जो किसी को सही ना लगे। कई बार आपके लिए हुए निर्णय आपको अकेला कर देता है। और आप उस समय अपने मष्तिक को आदेश दे रहे होते हैं और फिर आप वो करते हैं

जिससे सबकुछ बदलने लगता है। आपके आसपास का माहौल बदल जाता है। आपके आसपास के लोगों की आपके प्रति सोच बदल जाती है। आप जीवन में अपने लिए हुए मुश्किल निर्णय की वजह से सफलता की सीढ़ी चढ़ने लगते हैं।कई बार आपके लिए हुए निर्णय आपको भी सोचने पर मजबूर कर देती है।आपके साथ काम करने वाले आपके सहयोगी आपके इस निर्णय में अपनी असहमति जताते हैं। और समय आपके सामने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर देता है कि आपको अपने ही लिए हुए निर्णय पर दुबारा सोचने के लिए मजबूर कर देती है।

हमारे विचारों का आदान-प्रदान भी हमारी सोचने की क्षमता पर निर्भर करता है

लेकिन ऐसे समय में जब आप अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से खुद को संतुलित रखकर अपने मस्तिष्क से अपने इच्छानुसार कार्य करवाते हैं, तो आप जीवन के कठिन हालात से निकल कर एक सुन्दर जीवन का निर्माण करते हैं। आप सफल होते हैं और बहुत से लोगों के लिए एक उदाहरण बन जाते हैं। और तब आपके जीवन का उचित मुल्य आपको पता चलता है।जब आप को लोग मिलना चाहते हैं। आपके विचारों को सुनना चाहते हैं।आपके जैसा बनना चाहते हैं।आप के पास कई बार समय नहीं होता कि आप किसी के साथ बैठ कर उसको सुन सकें। और उसे जीवन का सही मतलब बता सकें।लेकिन ऐसे समय में भी आप किसी तरह उसको जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। और उस समय आपको अपने जीवन के होने पर गर्व महसूस होता है। आप अपने आज तक के लिए हुए निर्णय पर फक्र करते हैं। इस समाज के द्वारा आपके जीवन का सही मूल्यांकन किया जाता है। आपके जीवन में एक संतुलन आ जाता है।और आप का जीवन कैसा होगा यह आपको पता होता है।

बहुत से लोग अपने जीवन के इस दौर में भी रुकते नहीं है। वो निरंतर अपने जीवन में कुछ और करने की कोशिश कर रहे होते हैं। किसी सिद्ध पुरुष की तरह वो फिर से अपनी साधना करने में जुटे रहते हैं।उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वो अपने ही सफ़लता से खुश नहीं हैं।क्योंकि उन्हें पता है कि वो इससे और बेहतर कर सकते हैं। और उसके लिए उनका निरन्तर कार्य को करते रहना आवश्यक है। वो सिर्फ निरंतर आगे बढ़ने की कोशिश ही नहीं करते बल्कि हर पल इसके लिए कुछ नया सीखने की कोशिश भी करते हैं। एक नए और युवा छात्र की तरह उनके पास हर दिन एक नया सवाल होता है। हर दिन वो अपने कार्य को और बेहतर बनाने की योजना बनाते हैं। यही प्रक्रिया उन्हें आपसे अलग करता है और उसके जीवन को अनमोल बनाता है।

स्वयं का सच्चा मूल्यांकन विकास और सफलता के लिए प्रतिक्रिया देता है।

मूल्यांकन के लिए स्वाभाविक प्रतिक्रिया न्याय महसूस करना है। हमें एक ऐसी जगह पर परिपक्व होना है जहां हम कृतज्ञता के साथ इसका जवाब देते हैं, और प्रतिक्रिया प्यार करते हैं।

क्रिकेट तो काफी लोग खेलते हैं। अगर हम विश्व क्रिकेट की बात करें तो बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं जो बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। जिन्होंने क्रिकेट में अपनी एक छाप छोड़ी है।एक अध्याय लिखा है जिसकी कल्पना भी नहीं की थी किसी ने। लेकिन इन सब के बावजूद जब क्रिकेट में भगवान की बात आती है तो हम सचिन तेंदुलकर का नाम लेते हैं. एक ऐसा व्यक्ति जिसके क्रिकेट खेलने के जुनून ने उन्हें क्रिकेट का भगवान बना दिया।

किसी कार्य को ऐसे करें कि जब भी उस कार्य की चर्चा हो आपकी भी चर्चा हो। जिस दिन ऐसा होगा आपका जीवन अनमोल हो जाएगा।

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