सफलता आलोचकों को आकर्षित करती है – नफरत करने वालों को खुद पर हावी न होने दें।

आलोचनाओं को सुनना और उसे सहना आपको सर्वश्रेष्ठ बनाता है। यह मैं नहीं कहता, इतिहास इसका गवाह है। आलोचना आपके कार्य की सफलता का एक महत्वपूर्ण भाग है और आलोचना आपको अपने कार्य में दक्ष बनाता हैI अगर आप अपने जीवन में हुए कुछ सफलताओं को देखेंगे तो आपको लगेगा कि यह बिना आलोचना के सम्भव नहीं होता I जीवन के ज्यादातर लक्ष्य को हासिल करने के लिए बहुत सी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है I आलोचक आपके लिए किसी शुभचिंतक से कम नहीं होते हैंI

सोच बदलो ये मत सोचो की लोग क्या सोचेंगे

कठिनाई का सामना किया होगा। लेकिन Olympics 2020 में अपने गुरु के आशीर्वाद से बेहतरीन प्रदर्शन करके अपने आलोचकों को जवाब देंगे।।

अभी Olympics हो रहे है जिसमें कई ऐसे खिलाड़ी हैं। जिन्होंने अपने जीवन में कितनी आलोचनाओं का सामना किया होगा। कितनी ही
अपने आलोचनाओं को अपनी लिए बुरा मत मानिए। इसको अपने जीवन में सही रास्ता दिखाने के लिए सहायक समझिए। आप आलोचना करने वाले को चुप नहीं कर सकते हैं लेकिन जीवन में सफल होकर आप आलोचना करने वाले लोगों को जवाब दे सकते हैं।

आप उनके लिए भी एक प्रेरणा बन सकते हैं। यही होता है जब आप सफल हो जाते हैं तो आपसे सबसे ज्यादा प्रभावित आपके आलोचक ही होते हैं। और आप उनके लिए एक मार्गदर्शक का भी कार्य करते हैं। जीवन में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि, आपने कितनी आलोचनाओं का सामना किया, महत्वपूर्ण यह है कि, आपने इसका जवाब कितनी सफलतापूर्वक दिया।

उन सभी व्यक्तियों को गलत साबित करें और उन्हें अपनी सफलता दिखाएं।

चुनौती स्वीकार करें और खुद को सही साबित करें।कुछ पाने के लिए कुछ करना बहुत जरूरी है।

आलोचनाओं से घबराएँ नहीं। अगर आपकी आलोचना हो रही है, तो आप कुछ कर रहें हैं। और कुछ पाने के कुछ करना बहुत आवश्यक है।
Meera bai chanu biography

आलोचनाएँ आपको बेहतर बनाने में सबसे सहायक सिद्ध होती है। आलोचनाओं से आपको बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। अक्सर मैंने देखा है कि लोग अपनी आलोचना की वजह से किसी कार्य को करने का प्रयास भी नहीं करते हैं। आप अच्छा करें या फिर बुरा, आलोचना तो दोनों ही स्थितियों में होती है। यह आलोचना आपके अपने भी करते हैं और पराये भी। आलोचनाओं का सामना करना आसान है अगर आप उसे अपने आपको बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करें।

जीवन में अगर आप अपना लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं तो आपको आलोचना सुननी चाहिए। क्योंकि जरूरी नहीं है कि आलोचना करने वाला आपका दुश्मन हो या वह आपको बुरा चाहता हो। आलोचना आपके व्यक्तित्व को निखारने का सबसे अच्छा तरीका है। आप जब आलोचना को सुनकर उस पर विचार करते हैं तो आपके अंदर पूर्णता आती है। आलोचना आपके अंदर की कमी को प्रकट करता है। जो कई बार आप भी नहीं देख पाते हैं।

सफ़लता के लिए जितना महत्वपूर्ण आपको मिलने वाली शाबाशी और आपके द्वारा किए कार्य की सराहना की होती है। उतनी ही महत्वपूर्ण आपकी आलोचना भी होती है। मैं तो मानता हूँ कि बिना आलोचना के आप सफल नहीं हो सकते हैं। इसलिये आलोचना को सुनकर विचलित ना हो। बल्कि उस पर विचार करें और अपने व्यक्तित्व का निर्माण करें।

आलोचना आपको जीवन में एक बेहतर इंसान बनने में भी मदद करती है।

आलोचना आपके चरित्र का निर्माण भी करती है। जीवन खुद को खोजने के बारे में नहीं है, जीवन खुद को बनाने के बारे में है|
Meera bai cheenu blog

जब आप सफ़लता की सीढ़ी चढ़ने लगते हैं तो आपको आपके कार्य के लिए सराहना करने वाले कई लोग मिल जाते हैं।

जब आप जीवन में थोड़े सफल होते हैं तो स्वार्थवश कई लोग आपके प्रशंसक भी बन जाते हैं। आपकी हर तरफ तारीफ होने लगती है और आप अपनी खामियों को भूल जाते हैं। ऐसे समय में भी सबसे ज्यादा अगर किसी व्यक्ति का आपके जीवन में होना जरूरी है, तो वह होता है आपका आलोचक।

जो ऐसे समय में आपकी आलोचना करने की क्षमता रखता हो। जो ऐसे समय में जब आपको जानने वाले लोगों की संख्या बहुत हो। और आपके प्रशंसक आपके विरुद्ध कोई भी बात सुनना नहीं चाहते हों। ऐसे समय में अगर सच मुच कोई आपकी आलोचना करके आपकी खामियां उजागर करता है तो मैं मानता हूं कि, आप बहुत ही किस्मत के धनी व्यक्ति हैं। क्योंकि ऐसे समय में भी कोई है जो आपको दुनिया का सबसे सफल इंसान बनता देखना चाहता है।

आलोचना सिर्फ जीवन के सफ़लता में ही सहायक सिद्ध नहीं होती। बल्कि यह जीवन में आपको एक बेहतरीन इंसान बनने में भी सहायता करती है। आपके चरित्र का भी निर्माण करती है और आपको जीवन में आपके सामजिक दायित्वों का भी बोध कराती है।

आलोचना आपके जीवन में बाधा नहीं बनती। बल्कि यह आपकी शक्ति का विस्तार करता है।

आलोचना जीवन के हर उम्र में आपके व्यक्तित्व के निर्माण के लिए सहायक होता है।

आज मैं आपको एक ऐसे शख्सियत के बारे मे बताने जा रहा हूँ जिन्होंने हाल ही मे ओल्य्म्पिक 2020 मे सिल्वर मेडल जीता है मीराबाई चानू , जो भारत के एक उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर की राजधानी इम्फाल के एक छोटे से गांव में एक समान्य घर में जन्म लेने वाली मीराबाई चानू आज किसी परिचय की मुहताज नहीं हैं । एक छोटे से गांव की लड़की मीराबाई चानू अपने बचपन के दिनों से ही भारत्तोलक में रूचि रखती थी। केवल 12 वर्ष की उम्र में जब बच्चे अपने जीवन के छोटे छोटे सपनों में व्यस्त रहते हैं, मीराबाई लकड़ियों के गुच्छे उठाकर अभ्यास किया करती थी।

सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद चानू उन लोगों को नहीं भूली हैं जिन्‍होंने ट्रेनिंग के दौरान उनकी मदद की थी। चानू ने उन ट्रक ड्राइवरों को गिफ्ट दिए, जो उन्‍हें उनके गांव से ट्रेनिंग सेंटर पहुंचाते थे और बदले में पैसे नहीं लेते थे।

मीराबाई चानू के गांव से इम्‍फाल स्थित लम्‍पक स्‍पोर्ट्स कॉम्‍लेक्‍स करीब 25 किलोमीटर दूर है। वह ट्रक पर बैठकर वहां जाया करती थीं। ये ट्रक ड्राइवर उनसे पैसा नहीं लिया करते थे। इससे मीराबाई का काफी पैसा बचता था। पदक जीतने के बाद उन्‍होंने ऐसे ट्रक ड्राइवरों का पता लगाया और अपने घर पर बुलाकर उनका स्‍वागत किया।

कबीर ने कहा था कि-: जीवन में निंदा करने वाले लोगों को हमेशा आसपास रखना चाहिए क्योंकि ये लोग ही आपको बिना पानी और साबुन के आपको निर्मल बनाते हैं। कहने का तात्पर्य है कि आप को एक बेहतर इंसान बनाते हैं। यही जीवन का आनंद है।
आलोचनाएँ ही आपके जीवन में संस्कारों का भी निर्माण करता है। जीवन के मूल्यों से आपका परिचय करवाता है। आपको निरंतर आपके व्यक्तित्व के विकास में सहायता करता है।

हमें जीवन में आलोचक कष्ट भी देते हैं। क्योंकि उनकी आलोचना सहने की क्षमता कभी – कभी हमारे अंदर नहीं होती है। हमें आलोचना सुनकर क्रोध भी होता है। क्योंकि आलोचना करने वाले के लिए आलोचना करने का कोई दायरा नहीं होता है। आलोचना किसी भी हद तक हो सकती है। आपको आलोचना सुनने और उस पर कार्य करने के लिए बहुत सहनशक्ति की आवश्यकता होती है। बहुत जरूरी है कि आप आलोचना को अपने हित में समझकर उस को अपने बौधिक विकास के लिए इस्तेमाल करें।

मैंने अक़्सर देखा है कि एक सफल व्यक्ति भी अपनी आलोचनाओं से भयभीत हो जाता है। बहुत बार बुद्धिमान व्यक्ति भी अपनी आलोचना सहन नहीं कर पाता है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि आलोचनाओं से घबराएँ नहीं। इसकी उपयोगिता को समझने का प्रयास करें। अपने आलोचक से बचे नहीं बल्कि आलोचना करने के लिए उसका धन्यवाद करें।

सफलता मिलने के बाद आपको प्रशंसा मिलना बहुत आसान है। लेकिन आलोचना करने वाला व्यक्ति मिलना मुश्किल है। क्योंकि आलोचना वही कर सकता है जो आपके बारे में जानकारी रखता हो। जो आपके द्वारा करने वाले कार्य की जानकारी रखता है। आलोचना आपको दृढ़ संकल्प भी बनाता है। आपके कार्य के प्रति आपके समर्पण को दिखाता है।

अक्सर लोग छोटी मोटी आलोचना से ही दुखी हो जाते हैं। आलोचनाओं से घबरा जाते हैं और अपने कार्य के प्रति उदासीन होने लगते हैं। कई बार मैंने ऐसा भी देखा है कि लोग आलोचनाओं से डरकर जीवन में कायरता पूर्ण निर्णय भी ले लेते हैं। जैसे अपने जीवन को समाप्त करना। आपने लक्ष्य को अधूरा छोड़कर किसी और कार्य में सक्रिय रूप से सम्मिलित हो जाना। या फिर कोई नया कार्य प्रारंभ कर लेना।

सफ़लता के लिए जितना लक्ष्य के प्रति समर्पित होना अनिवार्य है उतना ही महत्वपूर्ण है उस कार्य को निरंतरता के साथ करना। आपके जीवन में बहुत सी बाधाएँ आयेंगी और आती भी है। जो आपको आपके लक्ष्य से दूर करने का प्रयास करती है। लेकिन आलोचना आपके जीवन में बाधक का कार्य नहीं करती। बल्कि यह आपके शक्ति का विस्तार करती है। आप कितने सामर्थ्यवान हैं यह बताती है। आपको इस बात का भी ध्यान दिलाती है कि आप को सफल होने के बाद कितना विनम्र होना चाहिए। जीवन में उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए जिनका आपकी इस सफ़लता में योगदान रहा है। मैं लड़ने जा रहा हूं यह आपकी शक्ति है। और आप लड़ने जा रहे हैं लेकिन आपको लड़ने से पहले ये तैयारी करनी चाहिए यह आपके शुभचिंतक द्वारा आपके लिए दिया जाने वाला बल है। जो आपको और मज़बूत बनाता है। आपको एहसास दिलाता है कि आप अकेले नहीं हैं।

आलोचना से बचने का एक ही तरीका है: कुछ न सुनें, कुछ न कहें और बस अपने लक्ष्य को देखें।

आप जितने ऊंचे चढ़ेंगे, उतने ही लोग आपको नीचे खींचने की कोशिश करेंगे।

मैंने ऐसा अनुभव किया है कि लोग इसे भी कभी-कभी नकारात्मक रूप में लेते हैं। जैसे उन्हें लगता है कि सलाह देने वाले लोगों को उनके काबिलियत या सामर्थ्य पर संदेह है। और ऐसी बातों को भी वह एक आलोचना की तरह ही लेते हैं।

आलोचनाओं को उसी तरह स्वीकार करिए जिस तरह आप अपनी प्रशंसा को स्वीकारते हैं

मैं अपने अनुभव के आधार पर पर यही कहना चाहता हूं कि अगर आप सफल होना चाहते हैं तो अपने आलोचना को सुनें उस पर विचार करें और फिर उसे दूर करने का प्रयास करें। आप सफलता के साथ – साथ सम्मान भी प्राप्त करेंगे।

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